बन रघुपति सुरपुर नरनाहू

चौपाई २, दोहा १७६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

बन रघुपति सुरपुर नरनाहू। तुम्ह एहि भाँति तात कदराहू॥ परिजन प्रजा सचिव सब अंबा। तुम्हही सुत सब कहँ अवलंबा॥ २ ॥

अर्थ

श्रीरघुनाथजी वन में हैं, महाराज स्वर्ग का राज्य करने चले गये। और हे तात! तुम इस प्रकार कातर हो रहे हो। हे पुत्र! कुटुम्ब, प्रजा, मन्त्री और सब माताओं के--सबके एक तुम ही सहारे हो।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १७६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु वसिष्ठ द्वारा भरत को धर्म-उपदेश और चित्रकूट यात्रा की तैयारी का वर्णन है।

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वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी