बन प्रदेस मुनि बास घनेरे
बन प्रदेस मुनि बास घनेरे
चौपाई १, दोहा २३६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
बन प्रदेस मुनि बास घनेरे। जनु पुर नगर गाउँ गन खेरे॥ बिपुल बिचित्र बिहग मृग नाना। प्रजा समाजु न जाइ बखाना॥ १ ॥
अर्थ
वन प्रदेशों में मुनियों के बहुत-से निवासस्थान हैं, मानो शहरों, नगरों, गाँवों और खेड़ों का समूह हो। बहुत-से विचित्र पक्षी और अनेकों पशु ही मानो प्रजाओं का समाज हैं, जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २३६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।
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भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध