बैठे राजसभाँ सब जाई
बैठे राजसभाँ सब जाई
चौपाई २, दोहा १७१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
बैठे राजसभाँ सब जाई। पठए बोलि भरत दोउ भाई॥ भरतु बसिष्ठ निकट बैठारे। नीति धरममय बचन उचारे॥ २ ॥
अर्थ
सब लोग राजसभामें जाकर बैठ गये। तब मुनिने भरतजी तथा शत्रुघ्नजी दोनों भाइयोंको बुलवा भेजा। भरतजीको वसिष्ठजीने अपने पास बैठा लिया और नीति तथा धर्मसे भरे हुए वचन कहे।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १७१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु वसिष्ठ द्वारा भरत को धर्म-उपदेश और चित्रकूट यात्रा की तैयारी का वर्णन है।
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वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी