बड़भागी बनु अवध अभागी
बड़भागी बनु अवध अभागी
चौपाई ३, दोहा ५६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
बड़भागी बनु अवध अभागी। जो रघुबंसतिलक तुम्ह त्यागी॥ जौं सुत कहौं संग मोहि लेहू। तुम्हरे हृदयँ होइ संदेहू॥ ३ ॥
अर्थ
हे रघुवंश के तिलक! वन बड़ा भाग्यवान् है और यह अवध अभागी है, जिसे तुमने त्याग दिया। हे पुत्र! यदि मैं कहूँ कि मुझे भी साथ ले चलो तो तुम्हारे हृदय में सन्देह होगा [कि माता इसी बहाने मुझे रोकना चाहती हैं]।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राम-कौसल्या संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा माता कौसल्या को वनवास का समाचार और धर्म का उपदेश का वर्णन है।
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राम-कौसल्या संवाद