अवसि नरेस बचन फुर करहू
अवसि नरेस बचन फुर करहू
चौपाई १, दोहा १७५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
अवसि नरेस बचन फुर करहू। पालहु प्रजा सोकु परिहरहू॥ सुरपुर नृपु पाइहि परितोषू। तुम्ह कहुँ सुकृतु सुजसु नहिं दोषू॥ १ ॥
अर्थ
राजा का वचन अवश्य सत्य करो। शोक त्याग दो और प्रजा का पालन करो। ऐसा करने से स्वर्ग में राजा सन्तोष पावेंगे और तुमको पुण्य और सुन्दर यश मिलेगा, दोष नहीं लगेगा।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १७५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु वसिष्ठ द्वारा भरत को धर्म-उपदेश और चित्रकूट यात्रा की तैयारी का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी