अवनिप अकनि रामु पगु धारे

चौपाई १, दोहा ४४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

अवनिप अकनि रामु पगु धारे। धरि धीरजु तब नयन उघारे॥ सचिवँ सँभारि राउ बैठारे। चरन परत नृप रामु निहारे॥ १ ॥

अर्थ

जब राजा ने सुना कि श्रीरामचन्द्र पधारे हैं तो उन्होंने धीरज धर के नेत्र खोले। मन्त्री ने सँभालकर राजा को बैठाया। राजा ने श्रीरामचन्द्रजी को अपने चरणों में पड़ते (प्रणाम करते) देखा।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राम-दशरथ संवाद, कैकेयी को समझाना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-दशरथ संवाद, अयोध्या का विषाद और कैकेयी को मनाने का असफल प्रयास का वर्णन है।

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राम-दशरथ संवाद, कैकेयी को समझाना