अति आनंद उमगि अनुरागा

चौपाई ४, दोहा १०१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

अति आनंद उमगि अनुरागा। चरन सरोज पखारन लागा॥ बरषि सुमन सुर सकल सिहाहीं। एहि सम पुन्यपुंज कोउ नाहीं॥ ४ ॥

अर्थ

अत्यन्त आनन्द और प्रेम में उमँगकर वह भगवान् के चरणकमल धोने लगा। सब देवता फूल बरसाकर सिहराने लगे कि इसके समान पुण्य की राशि कोई नहीं है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “केवट का प्रेम और गंगा पार” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १०१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में केवट द्वारा प्रभु के चरण पखारने और श्रीराम-सीता-लक्ष्मण को गंगा पार उतारने का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
केवट का प्रेम और गंगा पार