आसन सयन बिभूषन हीना
आसन सयन बिभूषन हीना
चौपाई ३, दोहा १४८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
आसन सयन बिभूषन हीना। परेउ भूमितल निपट मलीना॥ लेइ उसासु सोच एहि भाँती। सुरपुर तें जनु खँसेउ जजाती॥ ३ ॥
अर्थ
राजा आसन, शयन और आभूषणों से हीन, पृथ्वी पर निपट मलिन पड़े हुए हैं। वे लंबी साँसें लेकर इस प्रकार सोच करते हैं मानो स्वर्ग से राजा ययाति गिर पड़ा हो।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “सुमंत्र का शोकमग्न अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र का खाली रथ लेकर शोकमग्न अयोध्या में वापसी और राम-वियोग का सर्वत्र विषाद का वर्णन है।
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सुमंत्र का शोकमग्न अयोध्या लौटना