अस जियँ जानि सुजान सिरोमनि

चौपाई ४, दोहा ६६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

अस जियँ जानि सुजान सिरोमनि। लेइअ संग मोहि छाड़िअ जनि॥ बिनती बहुत करौं का स्वामी। करुनामय उर अंतरजामी॥ ४ ॥

अर्थ

ऐसा जी में जानकर, हे सुजानशिरोमणि! आप मुझे साथ ले लीजिये, यहाँ न छोड़िये। हे स्वामी! मैं अधिक क्या विनती करूँ? आप करुणामय हैं और सबके हृदय के अंदर की जाननेवाले हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीसीता-राम-संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ६६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का वनगमन का दृढ़ निश्चय और श्रीराम से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।

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श्रीसीता-राम-संवाद