अस जियँ जानि कहिअ सोइ ठाऊँ
अस जियँ जानि कहिअ सोइ ठाऊँ
चौपाई ३, दोहा १२६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
अस जियँ जानि कहिअ सोइ ठाऊँ। सिय सौमित्रि सहित जहँ जाऊँ॥ तहँ रचि रुचिर परन तृन साला। बासु करौं कछु काल कृपाला॥ ३ ॥
अर्थ
ऐसा हृदय में समझकर--वह स्थान बतलाइये जहाँ मैं लक्ष्मण और सीता सहित जाऊँ। और वहाँ सुन्दर पत्तों और घास की कुटी बनाकर, हे दयालु! कुछ समय निवास करूँ।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १२६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम और महर्षि वाल्मीकि का मिलन तथा प्रभु के सच्चे निवास का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।
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श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद