सहज सरल सुनि रघुबर बानी

चौपाई ४, दोहा १२६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सहज सरल सुनि रघुबर बानी। साधु साधु बोले मुनि ग्यानी॥ कस न कहहु अस रघुकुलकेतू। तुम्ह पालक संतत श्रुति सेतू॥ ४ ॥

अर्थ

श्रीरामजी की सहज ही सरल वाणी सुनकर ज्ञानी मुनि वाल्मीकि बोले--धन्य! धन्य! हे रघुकुल के ध्वजास्वरूप! आप ऐसा क्यों न कहेंगे? आप सदैव वेद की मर्यादा का पालन (रक्षण) करते हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १२६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम और महर्षि वाल्मीकि का मिलन तथा प्रभु के सच्चे निवास का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।

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श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद