अस बिचारि सोइ करहु उपाई

चौपाई २, दोहा ५७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

अस बिचारि सोइ करहु उपाई। सबहि जिअत जेहिं भेंटहु आई॥ जाहु सुखेन बनहि बलि जाऊँ। करि अनाथ जन परिजन गाऊँ॥ २ ॥

अर्थ

ऐसा विचारकर वही उपाय करना जिसमें सबके जीते-जी तुम आ मिलो। मैं बलिहारी जाती हूँ, तुम सेवकों, परिवारवालों और गाँव को अनाथ करके सुखपूर्वक वन को जाओ।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राम-कौसल्या संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा माता कौसल्या को वनवास का समाचार और धर्म का उपदेश का वर्णन है।

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राम-कौसल्या संवाद