आगम निगम प्रसिद्ध पुराना
आगम निगम प्रसिद्ध पुराना
चौपाई ४, दोहा २९३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
आगम निगम प्रसिद्ध पुराना। सेवाधरमु कठिन जगु जाना॥ स्वामि धरम स्वारथहि बिरोधू। बैरु अंध प्रेमहि न प्रबोधू॥ ४ ॥
अर्थ
वेद, शास्त्र और पुराणों में प्रसिद्ध है और जगत् जानता है कि सेवाधर्म बड़ा कठिन है। स्वामिधर्म में (स्वामी के प्रति कर्तव्यपालन में) और स्वार्थ में विरोध है (दोनों एक साथ नहीं निभ सकते)। वैर अंधा होता है और प्रेम को ज्ञान नहीं रहता [मैं स्वार्थवश कहूँगा या प्रेमवश, दोनों में ही भूल होने का भय है]।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “जनक-वसिष्ठ संवाद, सरस्वती द्वारा इन्द्र को समझाना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २९३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक-वसिष्ठ संवाद, इन्द्र की चिंता और सरस्वती द्वारा उनके संशय-निवारण का वर्णन है।
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जनक-वसिष्ठ संवाद, सरस्वती द्वारा इन्द्र को समझाना