आगें मुनिबर बाहन आछें

चौपाई ३, दोहा २२१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

आगें मुनिबर बाहन आछें। राजसमाज जाइ सबु पाछें॥ तेहि पाछें दोउ बंधु पयादें। भूषन बसन बेष सुठि सादें॥ ३ ॥

अर्थ

आगे अच्छी-अच्छी सवारियों पर श्रेष्ठ मुनि हैं, उनके पीछे सारा राजसमाज जा रहा है। उसके पीछे दोनों भाई बहुत सादे भूषण-वस्त्र और वेष से पैदल चल रहे हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरतजी चित्रकूट के मार्ग में” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २२१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी का चित्रकूट की ओर विरह और दीनभाव से प्रस्थान का वर्णन है।

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भरतजी चित्रकूट के मार्ग में