उर दहेउ कहेउ कि धरहु धाए

छन्द, दोहा १९ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

छन्द पाठ

उर दहेउ कहेउ कि धरहु धाए बिकट भट रजनीचरा। सर चाप तोमर सक्ति सूल कृपान परिघ परसु धरा॥ प्रभु कीन्हि धनुष टकोर प्रथम कठोर घोर भयावहा। भए बधिर ब्याकुल जातुधान न ग्यान तेहि अवसर रहा॥

अर्थ

[खर-दूषण] का हृदय जल उठा। तब उन्होंने कहा--पकड़ लो। [यह सुनकर] भयानक राक्षस योद्धा बाण, धनुष, तोमर, शक्ति, शूल, कृपाण, परिघ और परशु धारण किए हुए दौड़ पड़े। प्रभु श्रीरामजी ने पहले धनुष की कठोर, घोर और भयावह टंकार की, जिसे सुनकर राक्षस बहरे और व्याकुल हो गए। उस समय उन्हें कुछ भी होश न रहा॥

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध” प्रकरण का छन्द, दोहा १९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शूर्पणखा की दुष्टता, उसके उकसावे पर खर-दूषण का श्रीराम से युद्ध और उनका संहार का वर्णन है।

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शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध