तुम्हरेइँ भजन प्रभाव अघारी

चौपाई ३, दोहा १३ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

तुम्हरेइँ भजन प्रभाव अघारी। जानउँ महिमा कछुक तुम्हारी॥ ऊमरि तरु बिसाल तव माया। फल ब्रह्मांड अनेक निकाया॥ ३ ॥

अर्थ

हे पापों का नाश करनेवाले! मैं तो आप ही के भजन के प्रभाव से आपकी कुछ थोड़ी-सी महिमा जानता हूँ। आपकी माया गूलर के विशाल वृक्ष के समान है, अनेकों ब्रह्माण्डों के समूह ही जिसके फल हैं।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुतीक्ष्ण की भक्ति, अगस्त्य मुनि से संवाद, दंडक वन प्रवेश और जटायु मिलन का वर्णन है।

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अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन