ते तुम्ह सकल लोकपति साईं
ते तुम्ह सकल लोकपति साईं
चौपाई ५, दोहा १३ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
ते तुम्ह सकल लोकपति साईं। पूँछेहु मोहि मनुज की नाईं॥ यह बर मागउँ कृपानिकेता। बसहु हृदयँ श्री अनुज समेता॥ ५ ॥
अर्थ
उन्हीं आप ने समस्त लोकपतियों के स्वामी होकर भी मुझसे मनुष्य की तरह प्रश्न किया। हे कृपा के धाम! मैं तो यह वर माँगता हूँ कि आप श्रीसीताजी और छोटे भाई लक्ष्मणजी सहित मेरे हृदय में [सदा] निवास कीजिये।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा १३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुतीक्ष्ण की भक्ति, अगस्त्य मुनि से संवाद, दंडक वन प्रवेश और जटायु मिलन का वर्णन है।
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अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन