ताहि देइ गति राम उदारा

चौपाई ३, दोहा ३४ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

ताहि देइ गति राम उदारा। सबरी कें आश्रम पगु धारा॥ सबरी देखि राम गृहँ आए। मुनि के बचन समुझि जियँ भाए॥ ३ ॥

अर्थ

उदार श्रीरामजी उसे गति देकर शबरीजी के आश्रम में पधारे। शबरीजी ने श्रीरामचन्द्रजी को घर में आये देखा, तब मुनि के वचनों को समझकर उनका मन प्रसन्न हो गया।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शबरी पर प्रभु की कृपा, नवधा भक्ति उपदेश और पंपासर प्रस्थान का वर्णन है।

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शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति