सुनत अगस्ति तुरत उठि धाए
सुनत अगस्ति तुरत उठि धाए
चौपाई ५, दोहा १२ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनत अगस्ति तुरत उठि धाए। हरि बिलोकि लोचन जल छाए॥ मुनि पद कमल परे द्वौ भाई। रिषि अति प्रीति लिए उर लाई॥ ५ ॥
अर्थ
यह सुनते ही अगस्त्यजी तुरंत ही उठ दौड़े। भगवान् को देखते ही उनके नेत्रों में [आनन्द और प्रेम के आँसुओं का] जल भर आया। दोनों भाई मुनि के चरणकमलों पर गिर पड़े। ऋषि ने [उठाकर] बड़े प्रेम से उन्हें हृदय से लगा लिया।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा १२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुतीक्ष्ण की भक्ति, अगस्त्य मुनि से संवाद, दंडक वन प्रवेश और जटायु मिलन का वर्णन है।
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अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन