श्याम तामरस दाम शरीरं

चौपाई २, दोहा ११ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

श्याम तामरस दाम शरीरं। जटा मुकुट परिधन मुनिचीरं॥ पाणि चाप शर कटि तूणीरं। नौमि निरंतर श्रीरघुवीरं॥ २ ॥

अर्थ

हे नीलकमल की माला के समान श्याम शरीरवाले! हे जटाओं का मुकुट और मुनियों के (वल्कल) वस्त्र पहने हुए, हाथों में धनुष-बाण लिये तथा कमर में तरकस कसे हुए श्रीरामजी! मैं आपको निरन्तर नमस्कार करता हूँ।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुतीक्ष्ण की भक्ति, अगस्त्य मुनि से संवाद, दंडक वन प्रवेश और जटायु मिलन का वर्णन है।

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अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन