रूप रासि बिधि नारि सँवारी
रूप रासि बिधि नारि सँवारी
चौपाई ५, दोहा २२ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
रूप रासि बिधि नारि सँवारी। रति सत कोटि तासु बलिहारी॥ तासु अनुज काटे श्रुति नासा। सुनि तव भगिनि करहिं परिहासा॥ ५ ॥
अर्थ
विधाता ने उस स्त्री को रूप की राशि बनाया है कि सौ करोड़ रतियाँ उस पर बलिहारी हैं। उसके छोटे भाई ने मेरे नाक-कान काट डाले। सुनकर तुम्हारी बहिन कहकर वे मेरा परिहास करने लगे।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “शूर्पणखा का रावण के पास जाना, माया सीता” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा २२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शूर्पणखा द्वारा रावण में दुराशा जगाना, सीता का अग्नि प्रवेश और माया सीता का प्राकट्य का वर्णन है।
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शूर्पणखा का रावण के पास जाना, माया सीता