रावनारि जसु पावन गावहिं सुनहिं जे

दोहा ४६ (क) · अरण्यकाण्ड

दोहा पाठ

रावनारि जसु पावन गावहिं सुनहिं जे लोग। राम भगति दृढ़ पावहिं बिनु बिराग जप जोग॥ ४६ (क) ॥

अर्थ

जो लोग रावण के शत्रु श्रीरामजी का पवित्र यश गाते और सुनते हैं, वे वैराग्य, जप और योग के बिना ही श्रीरामजी की दृढ़ भक्ति पाते हैं।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “संतों के लक्षण और सत्संग प्रेरणा” प्रकरण का दोहा ४६ (क) है। इस प्रकरण में संतों के स्वभाव, विनय, दया और सत्संग-भजन की महिमा का वर्णन है।

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संतों के लक्षण और सत्संग प्रेरणा