रघुपति अनुजहि आवत देखी

चौपाई १, दोहा ३० के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

रघुपति अनुजहि आवत देखी। बाहिज चिंता कीन्हि बिसेषी॥ जनकसुता परिहरिहु अकेली। आयहु तात बचन मम पेली॥ १ ॥

अर्थ

[इधर] श्रीरघुनाथजी ने छोटे भाई लक्ष्मणजी को आते देखकर बाह्य रूप में बहुत चिन्ता की [और कहा-] हे भाई! तुमने जानकी को अकेली छोड़ दिया और मेरी आज्ञा का उल्लंघन कर यहाँ चले आये।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “राम का विलाप और जटायु प्रसंग” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीता-वियोग में राम के विलाप और जटायु को मुक्ति मिलने का वर्णन है।

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राम का विलाप और जटायु प्रसंग