पूरनकाम राम सुख रासी

चौपाई ९, दोहा ३० के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

पूरनकाम राम सुख रासी। मनुजचरित कर अज अबिनासी॥ आगें परा गीधपति देखा। सुमिरत राम चरन जिन्ह रेखा॥ ९ ॥

अर्थ

पूर्णकाम, आनन्द की राशि, अजन्मा और अविनाशी श्रीरामजी मनुष्यों-से चरित्र कर रहे हैं। आगे [जाने पर] उन्होंने गीधपति जटायु को पड़ा देखा। वह श्रीरामजी के चरणों का स्मरण कर रहा था, जिनमें [ध्वजा-कुलिश आदिकी] रेखाएँ (चिह्न) हैं।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “राम का विलाप और जटायु प्रसंग” प्रकरण का चौपाई ९, दोहा ३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीता-वियोग में राम के विलाप और जटायु को मुक्ति मिलने का वर्णन है।

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राम का विलाप और जटायु प्रसंग