पठंति ये स्तवं इदं

छन्द १२, दोहा ४ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

छन्द पाठ

पठंति ये स्तवं इदं। नरादरेण ते पदं। व्रजंति नात्र संशयं। त्वदीय भक्ति संयुताः॥ १२ ॥

अर्थ

जो मनुष्य इस स्तुति को आदरपूर्वक पढ़ते हैं, वे आपकी भक्ति से युक्त होकर आपके परमपद को प्राप्त होते हैं, इसमें सन्देह नहीं।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “अत्रि मिलन और स्तुति” प्रकरण का छन्द १२, दोहा ४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अत्रि मुनि द्वारा श्रीराम के आश्रम में स्वागत और भावपूर्ण स्तुति का वर्णन है।

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अत्रि मिलन और स्तुति