पंथ कहत निज भगति अनूपा
पंथ कहत निज भगति अनूपा
चौपाई ३, दोहा १२ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
पंथ कहत निज भगति अनूपा। मुनि आश्रम पहुँचे सुरभूपा॥ तुरत सुतीछन गुर पहिं गयऊ। करि दंडवत कहत अस भयऊ॥ ३ ॥
अर्थ
रास्ते में अपनी अनुपम भक्ति का वर्णन करते हुए देवताओं के राजराजेश्वर श्रीरामजी अगस्त्य मुनि के आश्रम पर पहुँचे। सुतीक्ष्ण तुरंत ही गुरु अगस्त्यजी के पास गये और दण्डवत् करके ऐसा कहने लगे—।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुतीक्ष्ण की भक्ति, अगस्त्य मुनि से संवाद, दंडक वन प्रवेश और जटायु मिलन का वर्णन है।
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अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन