नवम सरल सब सन छलहीना

चौपाई ३, दोहा ३६ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

नवम सरल सब सन छलहीना। मम भरोस हियँ हरष न दीना॥ नव महुँ एकउ जिन्ह कें होई। नारि पुरुष सचराचर कोई॥ ३ ॥

अर्थ

नवीं भक्ति है सरलता और सब के साथ कपटरहित बर्ताव करना, हृदय में मेरा भरोसा रखना और किसी भी अवस्था में हर्ष और दैन्य (विषाद) का न होना। इन नौ में से जिनके एक भी होती है, वह स्त्री-पुरुष, जड़-चेतन कोई भी हो--।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शबरी पर प्रभु की कृपा, नवधा भक्ति उपदेश और पंपासर प्रस्थान का वर्णन है।

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शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति