मुनि मख राखन गयउ कुमारा

चौपाई ३, दोहा २५ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

मुनि मख राखन गयउ कुमारा। बिनु फर सर रघुपति मोहि मारा॥ सत जोजन आयउँ छन माहीं। तिन्ह सन बयरु किएँ भल नाहीं॥ ३ ॥

अर्थ

यही राजकुमार मुनि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा के लिये गये थे। उस समय श्रीरघुनाथजी ने बिना फल का बाण मुझे मारा था, जिससे मैं क्षण भर में सौ योजन पर आ गिरा। उनसे बैर करने में भलाई नहीं है।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “स्वर्ण मृग और मारीच वध” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मारीच का स्वर्ण मृग रूप धारण और श्रीराम द्वारा उसका वध तथा मोक्ष-प्रदान का वर्णन है।

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स्वर्ण मृग और मारीच वध