मोर कहा तुम्ह ताहि सुनावहु

चौपाई ४, दोहा १९ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

मोर कहा तुम्ह ताहि सुनावहु। तासु बचन सुनि आतुर आवहु॥ दूतन्ह कहा राम सन जाई। सुनत राम बोले मुसुकाई॥ ४ ॥

अर्थ

मेरा यह कथन तुम लोग उसे सुनाओ और उसका वचन (उत्तर) सुनकर शीघ्र आओ। दूतों ने जाकर यह सन्देश श्रीरामचन्द्रजी से कहा। उसे सुनते ही श्रीरामचन्द्रजी मुसकराकर बोले--।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शूर्पणखा की दुष्टता, उसके उकसावे पर खर-दूषण का श्रीराम से युद्ध और उनका संहार का वर्णन है।

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शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध