मंत्र जाप मम दृढ़ बिस्वासा
मंत्र जाप मम दृढ़ बिस्वासा
चौपाई १, दोहा ३६ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
मंत्र जाप मम दृढ़ बिस्वासा। पंचम भजन सो बेद प्रकासा॥ छठ दम सील बिरति बहु करमा। निरत निरंतर सज्जन धरमा॥ १ ॥
अर्थ
मेरे (राम) मन्त्र का जाप और मुझमें दृढ़ विश्वास—यह पाँचवीं भक्ति है, जो वेदों में प्रसिद्ध है। छठी भक्ति है इन्द्रियों का निग्रह, शील, बहुत-से कार्यों से वैराग्य और निरंतर संत पुरुषों के धर्म में लगे रहना।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शबरी पर प्रभु की कृपा, नवधा भक्ति उपदेश और पंपासर प्रस्थान का वर्णन है।
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शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति