मधुकर मुखर भेरि सहनाई
मधुकर मुखर भेरि सहनाई
चौपाई ५, दोहा ३८ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
मधुकर मुखर भेरि सहनाई। त्रिबिध बयारि बसीठीं आई॥ चतुरंगिनी सेन सँग लीन्हें। बिचरत सबहि चुनौती दीन्हें॥ ५ ॥
अर्थ
भौंरों की गुंजार भेरी और शहनाई है। शीतल, मन्द और सुगन्धित हवा मानो दूत का काम लेकर आयी है। इस प्रकार चतुरंगिनी सेना साथ लिये कामदेव मानो सबको चुनौती देता हुआ विचर रहा है।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ३८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शबरी पर प्रभु की कृपा, नवधा भक्ति उपदेश और पंपासर प्रस्थान का वर्णन है।
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शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति