कोउ कह जिअत धरहु द्वौ भाई

चौपाई ५, दोहा १८ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

कोउ कह जिअत धरहु द्वौ भाई। धरि मारहु तिय लेहु छड़ाई॥ धूरि पूरि नभ मंडल रहा। राम बोलाइ अनुज सन कहा॥ ५ ॥

अर्थ

कोई कहता है दोनों भाइयों को जीता ही पकड़ लो, पकड़कर मार डालो और स्त्री को छीन लो। आकाशमण्डल धूल से भर गया। तब श्रीरामजी ने लक्ष्मणजी को बुलाकर उनसे कहा--।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा १८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शूर्पणखा की दुष्टता, उसके उकसावे पर खर-दूषण का श्रीराम से युद्ध और उनका संहार का वर्णन है।

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शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध