खल बधि तुरत फिरे रघुबीरा
खल बधि तुरत फिरे रघुबीरा
चौपाई १, दोहा २८ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
खल बधि तुरत फिरे रघुबीरा। सोह चाप कर कटि तूनीरा॥ आरत गिरा सुनी जब सीता। कह लछिमन सन परम सभीता॥ १ ॥
अर्थ
दुष्ट मारीच को मारकर श्रीरघुवीर तुरंत लौट पड़े। हाथ में धनुष और कमर में तरकस शोभा दे रहा है। इधर जब सीताजी ने दुःखभरी वाणी (मरते समय मारीच की 'हा लक्ष्मण' की आवाज) सुनी तो वे बहुत ही भयभीत होकर लक्ष्मणजी से कहने लगीं--।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “श्रीसीता हरण और श्रीसीता विलाप” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण द्वारा सीताजी का छलपूर्वक हरण और उनका करुण विलाप का वर्णन है।
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श्रीसीता हरण और श्रीसीता विलाप