काम क्रोध लोभादि मद प्रबल मोह
काम क्रोध लोभादि मद प्रबल मोह
दोहा ४३ · अरण्यकाण्ड
दोहा पाठ
काम क्रोध लोभादि मद प्रबल मोह कै धारि। तिन्ह महँ अति दारुन दुखद मायारूपी नारि॥ ४३ ॥
अर्थ
काम, क्रोध, लोभ और मद आदि मोह (अज्ञान) की प्रबल सेना है। इनमें मायारूपिणी (माया की साक्षात् मूर्ति) स्त्री तो अत्यन्त दारुण दुःख देनेवाली है।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “नारद-राम संवाद” प्रकरण का दोहा ४३ है। इस प्रकरण में देवर्षि नारद और श्रीराम के बीच भक्ति, नाम-महिमा और दिव्य कृपा के गूढ़ संवाद का वर्णन है।
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नारद-राम संवाद