कलिमल समन दमन मन राम सुजस

दोहा ६ (क) · अरण्यकाण्ड

दोहा पाठ

कलिमल समन दमन मन राम सुजस सुखमूल। सादर सुनहिं जे तिन्ह पर राम रहहिं अनुकूल॥ ६ (क) ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी का सुन्दर यश कलियुग के पापों का नाश करनेवाला, मन को दमन करनेवाला और सुख का मूल है। जो लोग इसे आदरपूर्वक सुनते हैं, उन पर श्रीरामजी प्रसन्न रहते हैं।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “अनसूया का सीता को उपदेश” प्रकरण का दोहा ६ (क) है। इस प्रकरण में सीता और अनसूया के मिलन तथा अनसूया द्वारा पातिव्रत धर्म के उपदेश का वर्णन है।

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अनसूया का सीता को उपदेश