ईस्वर जीव भेद प्रभु सकल कहौ
ईस्वर जीव भेद प्रभु सकल कहौ
दोहा १४ · अरण्यकाण्ड
दोहा पाठ
ईस्वर जीव भेद प्रभु सकल कहौ समुझाइ॥ जातें होइ चरन रति सोक मोह भ्रम जाइ॥ १४ ॥
अर्थ
हे प्रभो! ईश्वर और जीव का भेद भी सब समझाकर कहिये, जिससे आपके चरणों में मेरी प्रीति हो और शोक, मोह तथा भ्रम नष्ट हो जायँ।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “पंचवटी निवास और राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का दोहा १४ है। इस प्रकरण में पंचवटी निवास में श्रीराम द्वारा लक्ष्मण को ज्ञान, वैराग्य, माया और भक्ति के उपदेश का वर्णन है।
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पंचवटी निवास और राम-लक्ष्मण संवाद