हे खग मृग हे मधुकर श्रेनी
हे खग मृग हे मधुकर श्रेनी
चौपाई ५, दोहा ३० के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
हे खग मृग हे मधुकर श्रेनी। तुम्ह देखी सीता मृगनैनी॥ खंजन सुक कपोत मृग मीना। मधुप निकर कोकिला प्रबीना॥ ५ ॥
अर्थ
हे पक्षियों! हे पशुओं! हे भौंरों की श्रेणियों! तुमने कहीं मृगनयनी सीता को देखा है? खंजन, सुक, कपोत, मृग, मीन, मधुपों का समूह, प्रवीण कोयल,
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “राम का विलाप और जटायु प्रसंग” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीता-वियोग में राम के विलाप और जटायु को मुक्ति मिलने का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
राम का विलाप और जटायु प्रसंग