हा जग एक बीर रघुराया
हा जग एक बीर रघुराया
चौपाई १, दोहा २९ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
हा जग एक बीर रघुराया। केहिं अपराध बिसारेहु दाया॥ आरति हरन सरन सुखदायक। हा रघुकुल सरोज दिननायक॥ १ ॥
अर्थ
[सीताजी विलाप कर रही थीं--] हा जगत् के अद्वितीय वीर श्रीरघुनाथजी! आपने किस अपराध से मुझपर दया भुला दी। हे दुःखों के हरनेवाले, हे शरणागत को सुख देनेवाले, हा रघुकुलरूपी कमल के सूर्य!
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “श्रीसीता हरण और श्रीसीता विलाप” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण द्वारा सीताजी का छलपूर्वक हरण और उनका करुण विलाप का वर्णन है।
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श्रीसीता हरण और श्रीसीता विलाप