दिब्य बसन भूषन पहिराए

चौपाई २, दोहा ५ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

दिब्य बसन भूषन पहिराए। जे नित नूतन अमल सुहाए॥ कह रिषिबधू सरस मृदु बानी। नारिधर्म कछु ब्याज बखानी॥ २ ॥

अर्थ

और उन्हें ऐसे दिव्य वस्त्र और आभूषण पहनाये, जो नित्य-नये, निर्मल और सुहावने बने रहते हैं। फिर ऋषिबधू ने सरस, कोमल वाणी से स्त्रियों के कुछ धर्म का बहाना करके कहने लगीं।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “अनसूया का सीता को उपदेश” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीता और अनसूया के मिलन तथा अनसूया द्वारा पातिव्रत धर्म के उपदेश का वर्णन है।

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अनसूया का सीता को उपदेश