अनुसुइया के पद गहि सीता
अनुसुइया के पद गहि सीता
चौपाई १, दोहा ५ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
अनुसुइया के पद गहि सीता। मिली बहोरि सुसील बिनीता॥ रिषिपतिनी मन सुख अधिकाई। आसिष देइ निकट बैठाई॥ १ ॥
अर्थ
फिर परम शीलवती और विनम्र श्रीसीताजी [अत्रिजी की पत्नी] अनसूयाजी के चरण पकड़कर उनसे मिलीं। ऋषिपत्नी के मन में बड़ा सुख हुआ। उन्होंने आशिष देकर सीताजी को निकट बैठा लिया।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “अनसूया का सीता को उपदेश” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीता और अनसूया के मिलन तथा अनसूया द्वारा पातिव्रत धर्म के उपदेश का वर्णन है।
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अनसूया का सीता को उपदेश