धर्म तें बिरति जोग तें ग्याना
धर्म तें बिरति जोग तें ग्याना
चौपाई १, दोहा १६ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
धर्म तें बिरति जोग तें ग्याना। ग्यान मोच्छप्रद बेद बखाना॥ जातें बेगि द्रवउँ मैं भाई। सो मम भगति भगत सुखदाई॥ १ ॥
अर्थ
धर्म (के आचरण) से वैराग्य और योग से ज्ञान होता है तथा ज्ञान मोक्ष का देनेवाला है--ऐसा वेदों ने वर्णन किया है। और हे भाई ! जिससे मैं शीघ्र ही प्रसन्न होता हूँ, वह मेरी भक्ति है जो भक्तों को सुख देनेवाली है।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “पंचवटी निवास और राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पंचवटी निवास में श्रीराम द्वारा लक्ष्मण को ज्ञान, वैराग्य, माया और भक्ति के उपदेश का वर्णन है।
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पंचवटी निवास और राम-लक्ष्मण संवाद