बिनु अवसर भय तें रह जोई

चौपाई ८, दोहा ५ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

बिनु अवसर भय तें रह जोई। जानेहु अधम नारि जग सोई॥ पति बंचक परपति रति करई। रौरव नरक कल्प सत परई॥ ८ ॥

अर्थ

और जो स्त्री मौका न मिलने से या भयवश पतिक्रता बनी रहती है, जगत् में उसे अधम स्त्री जानना। पति को धोखा देनेवाली जो स्त्री पराये पति से रति करती है, वह तो सौ कल्प तक रौरव नरक में पड़ी रहती है।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “अनसूया का सीता को उपदेश” प्रकरण का चौपाई ८, दोहा ५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीता और अनसूया के मिलन तथा अनसूया द्वारा पातिव्रत धर्म के उपदेश का वर्णन है।

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अनसूया का सीता को उपदेश