अनुज समेत गए प्रभु तहवाँ

चौपाई ३, दोहा ३० के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

अनुज समेत गए प्रभु तहवाँ। गोदावरि तट आश्रम जहवाँ॥ आश्रम देखि जानकी हीना। भए बिकल जस प्राकृत दीना॥ ३ ॥

अर्थ

लक्ष्मणजी सहित प्रभु श्रीरामजी वहाँ गये जहाँ गोदावरी के तट पर उनका आश्रम था। आश्रम को जानकीजी से रहित देखकर श्रीरामजी साधारण मनुष्य की भाँति व्याकुल और दीन (दुखी) हो गये।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “राम का विलाप और जटायु प्रसंग” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीता-वियोग में राम के विलाप और जटायु को मुक्ति मिलने का वर्णन है।

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राम का विलाप और जटायु प्रसंग