यह सुभ संभु उमा संबादा
यह सुभ संभु उमा संबादा
चौपाई १, दोहा १३० के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
यह सुभ संभु उमा संबादा। सुख संपादन समन बिषादा॥ भव भंजन गंजन संदेहा। जन रंजन सज्जन प्रिय एहा॥ १ ॥
अर्थ
शम्भु-उमा का यह कल्याणकारी संवाद सुख उत्पन्न करनेवाला और शोक का नाश करनेवाला है। जन्म-मरण का अन्त करनेवाला, सन्देहों का नाश करनेवाला, भक्तों को आनन्द देनेवाला और संत पुरुषों को प्रिय है।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “रामायण माहात्म्य और फलस्तुति” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामायण की महिमा, तुलसीदास की विनय और पाठ-श्रवण के पुण्यफल का वर्णन है।
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रामायण माहात्म्य और फलस्तुति