तिन्ह पर एक एक बिटप बिसाला

चौपाई ५, दोहा ५६ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

तिन्ह पर एक एक बिटप बिसाला। बट पीपर पाकरी रसाला॥ सैलोपरि सर सुंदर सोहा। मनि सोपान देखि मन मोहा॥ ५ ॥

अर्थ

उन शिखरों पर एक-एक विशाल वृक्ष है—बरगद, पीपल, पाकर और आम। पर्वत के ऊपर एक सुन्दर तालाब शोभित है; मणियों की सीढ़ियाँ देखकर मन मोहित हो जाता है।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ५६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा