तव सरूप गारुड़ि रघुनायक

चौपाई ४, दोहा ९३ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

तव सरूप गारुड़ि रघुनायक। मोहि जिआयउ जन सुखदायक॥ तव प्रसाद मम मोह नसाना। राम रहस्य अनूपम जाना॥ ४ ॥

अर्थ

आपके स्वरूपरूपी गारुड़ी (साँप का विष उतारनेवाले) के द्वारा भक्तों को सुख देनेवाले श्रीरघुनाथजी ने मुझे जिला लिया। आपकी कृपा से मेरा मोह नाश हो गया और मैंने श्रीरामजी का अनुपम रहस्य जाना।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ९३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा