ताते सुर सीसन्ह चढ़त जग बल्लभ
ताते सुर सीसन्ह चढ़त जग बल्लभ
दोहा ३७ · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
ताते सुर सीसन्ह चढ़त जग बल्लभ श्रीखंड। अनल दाहि पीटत घनहिं परसु बदन यह दंड॥ ३७ ॥
अर्थ
इसी गुण के कारण चन्दन देवताओं के सिरों पर चढ़ता है और जगत् का प्रिय हो रहा है और कुल्हाड़ी के मुख को यह दण्ड मिलता है कि उसको आग में जलाकर फिर घन से पीटते हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “भरत का प्रश्न, राम का उपदेश” प्रकरण का दोहा ३७ है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा भरतजी के प्रश्न और राम के धर्म, भक्ति तथा संत-असंत-विवेक के उपदेश का वर्णन है।
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भरत का प्रश्न, राम का उपदेश