सुनु खगपति अस समुझि प्रसंगा
सुनु खगपति अस समुझि प्रसंगा
चौपाई ७, दोहा १०६ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनु खगपति अस समुझि प्रसंगा। बुध नहिं करहिं अधम कर संगा॥ कबि कोबिद गावहिं असि नीती। खल सन कलह न भल नहिं प्रीती॥ ७ ॥
अर्थ
हे पक्षिराज! सुनिए, ऐसी बात समझकर बुद्धिमान लोग अधम (नीच) का संग नहीं करते। कवि और पण्डित ऐसी नीति कहते हैं कि दुष्ट से न कलह ही अच्छा है, न प्रेम ही।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म, कलि महिमा” प्रकरण का चौपाई ७, दोहा १०६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म-वृत्तांत और कलियुग की महिमा एवं भक्ति की शरण का वर्णन है।
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काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म, कलि महिमा