सुनि सब कथा हृदय अति भाई

चौपाई ४, दोहा १२९ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनि सब कथा हृदय अति भाई। गिरिजा बोली गिरा सुहाई॥ नाथ कृपाँ मम गत संदेहा। राम चरन उपजेउ नव नेहा॥ ४ ॥

अर्थ

[याज्ञवल्क्यजी कहते हैं--] सब कथा सुनकर श्रीपार्वतीजी के हृदय को बहुत ही प्रिय लगी और वे सुन्दर वाणी बोलीं--स्वामी की कृपा से मेरा सन्देह जाता रहा और श्रीरामजी के चरणों में नवीन प्रेम उत्पन्न हो गया।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “रामायण माहात्म्य और फलस्तुति” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १२९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामायण की महिमा, तुलसीदास की विनय और पाठ-श्रवण के पुण्यफल का वर्णन है।

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रामायण माहात्म्य और फलस्तुति