सुनत सुधासम बचन राम के

चौपाई १, दोहा ४७ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनत सुधासम बचन राम के। गहे सबनि पद कृपाधाम के॥ जननि जनक गुर बंधु हमारे। कृपा निधान प्रान ते प्यारे॥ १ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी के अमृत के समान वचन सुनकर सबने कृपाधाम के चरण पकड़ लिये [और कहा--] हे कृपानिधान! आप हमारे माता, पिता, गुरु, भाई सब कुछ हैं और प्राणों से भी अधिक प्रिय हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “राम का प्रजा को उपदेश” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा प्रजा को धर्म, वैराग्य और भक्ति का उपदेश तथा पुरवासियों की कृतज्ञता का वर्णन है।

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राम का प्रजा को उपदेश